Книга Chandrakanta Devaki Nandan Khatri

Chandrakanta

Автор: Devaki Nandan Khatri
Език: Хинди
Корици: С твърди корици
Издател: CLASSY PUB
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किसी तरह किसी की लौ तभी तक लगी रहती है जब तक कोई दूसरा आदमी किसी तरह की चोट उसके दिमाग पर न दे और उस...

Информация за книгата

Език
Хинди
Корици
Книга - С твърди корици
Издадена
2023
страници
270
EAN
9789394780286
ISBN
9394780289
Enbook ID
43276525
Издател
Теглоt
490
Размери
140 x 216 x 19

Пълно описание

किसी तरह किसी की लौ तभी तक लगी रहती है जब तक कोई दूसरा आदमी किसी तरह की चोट उसके दिमाग पर न दे और उसके ध्यान को छेड़ कर न बिगाड़े, इसीलिए योगियों को एकांत में बैठना कहा है। कुँवर वीरेंद्र सिंह और कुमारी चन्द्रकांता की मुहब्बत बाज़ारू न थी, वे दोनों एक रूप हो रहे थे, दिल ही दिल में अपनी जुदाई का सदमा एक ने दूसरे से कहा और दोनों समझ गए मगर किसी पास वाले को मालूम न हुआ, क्यूंकि ज़ुबान दोनों की बंद थी। -देवकीनन्दन खत्री

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