यह किताब बात करती है एक इंसान में माजूद कई छवियों की जो प्रदर्शित होता है हमारे चेहरे से और चेहरा जो दिखता एक है लेकिंन उस एक के पीछे कई चेहरे होते हैं, जो समय और जरूरत के हिसाब से बदलते रहते है, कई बार तो ये चेहरे हमें खुद हैरान कर जाते हैं, कि, क्या हमारा एक चेहरा ऐसा भी हो सकता है? जिससे आज तक हम परिचित ही न थे और फिर हमारे मशतिष्क में हमारे ही खिलाफ सवाल पैदा करने पर मजबूर कर देते है, कितनी बार हमारा चेहरा जो प्यार कि बातें करता है वो कैसे किसी के शोषण पर उतारू हो जाता है, चेहरे कि इन्हीं परतों को पढ़ने, जानने और दर्शाने कि कोशिश कि गयी है। इस किताब में लिखी गयी रचनाओं के द्वारा। इन रचनाओं को सिर्फ विचारने कि ही नहीं बल्कि जीने कि भी कोशिश कि गयी है, जीवन के हर रंग हर मोड़ और रोज़ाना कि व्यथा, सामाजिक व्यवस्था, उस व्यवस्था में हम, प्यार, दिल के जज़्बात, इन सबसे उठते सवाल, इन सवालों के जवाब तलाशता इंसान, हर व्यक्ति कि बात कहता, दिल तक जुड़ता इंसान, ज़िंदगी कि परत को एक एक कर खोलती रचनाएँ झकझोर जाती हैं पूरे व्यक्तित्व को, और मुलाक़ात कराती हैं हमारे ही अनछुए अनदेखे भाग से, इस किताब के चारों भाग परतों की तलाश करने में न्याय करने की कोशिश लगातार कर रहे हैं।